Rajasthan : हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री में आग लगने की घटना के बाद उच्च विवाद ने अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है कलेक्टर में हुई प्रशासन और किस प्रतिनिधित्व की लंबी वार्ता के बाद किसी ठोस नदी पर नतीजे पर न पहुंचने के कारण बातचीत के बेनतीजा होने के कारण किसानों ने 17 दिसंबर को प्रस्तावित कलेक्ट घेराव की रणनीति को बदलाव करते हुए जंक्शन स्थित धान मंडी में मां पंचायत करने का ऐलान कर दिया है इस फैसले के साथ ही जिले में प्रशासन और किसानों के बीच भारी टकराव की स्थिति और भयंकर होती नजर आ रही है थोड़ा बहुत ऐसे शब्द पाठक के बीच में बाकी तुम इसको पहले दे देगा फ्रॉम तो ज्यादा चेंज नहीं करना पड़ेगा इससे अपना टाइम बचेगा।
राती खेड़ा की घटना से शुरू हुआ पूरा किस प्रशासन विवाद
टिब्बी क्षेत्र के राजाखेड़ा गांव में स्थित एथेनॉल फैक्ट्री में 10 दिसंबर को हुई आग लगने की घटना ने पूरे इलाके में खलबली मचा के रख दी थी आगजनी के बाद किसानों के बीच फैक्ट्री को लेकर पुरानी आशंकाएं जताई गई फिर कई बातें सामने उबर कारण जिसमें स्थानीय किसानों का कहना है कि यह फैक्ट्री प्राइवेट जलस्तर और खेती पर प्रतिकूल असर डाल रही है या डाल सकती है आज की घटना नहीं आशंका को और गहरा और घातक बना दिया है घटना के बाद से किसान और प्रशासन के बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है जिसके बाद किस संगठन ने साफ तौर पर बता दिया है कि उनकी मांगों पर अगर ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली तो आंदोलन को और भारी और उग्रता और पर देखा जाएगा
कलेक्टर वार्ता क्यों रही बे नतीजा जानिए कार
घटनाक्रम को शांत करने के बाद के उद्देश्य ही जिला परिषद ने कलेक्टर में एक आम बैठक बुलवाई गई जिसके तहत इस बैठक में जिला कलेक्टर समेत प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और किसने की ओर से स्थानीय किसान नेता और उनके कई बड़े प्रतिनिधि शामिल हुए जिनका मुख्य कारण इस पूरे घटनाक्रम को एक स्थिति को निष्कर्ष तक पहुंचाना बताया जा रहा है
वार्ता का मुख्य उद्देश्य किया
इथेनॉल फैक्ट्री में आग लगने की घटना की निष्पक्षजांच हो
किसने की सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी आशंकाओं पर गहनचर्चा
17 दिसंबर को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर सहमति
परंतु कई घंटे चली बातचीत के बावजूद भी किसी भी बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच में कोई समिति नहीं बन सकी किसान नेताओं को कहना है की प्रशंसा केवल आशा शासन देने की बात कर रहा है जबकि वह लिखित और ठोस लेना चाहते हैं जिससे किसान अशशित हो सके और इस आंदोलन को एक ठहराव की स्थिति मिलसके
किसान क्यों आ रहे हैं अपनी मांगों पर क्या हैअसल वजह
किसान नेताओं कसाव कहना है कि आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंट के तहत नहीं किया जा रहा बल्कि उनकी जमीन पानी और भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए किसान की मुख्य बाद भारत व उसकी प्राचीन खेती से जुड़ी बताई जा रही है जिम किसने की प्रमुख कई मांगे यह बताइए
फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा मां को की स्वतंत्रता तौर परजांच
ऑर्गेनिक की घटना के जिम्मेदारों की जवाब दे ही तय करना
पर्यावरण और जल स्तर पर प्रभाव को लेकर विस्तृत रिपोर्ट और सार्वजनिक जनता समक्ष रखना
प्रभावित किसानों को विश्वास में लेकर आगे की कार्रवाई को बढ़ाना या निरंतररखना
किसानों का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर स्पष्ट और सोच समाधान देखने को नहीं मिलेगा तब तक की आंदोलन जारी रहेगा अन्यथा इस और उग्र कर कर प्रशासन के खिलाफ एवं इस पूरे जन्म और उसके खिलाफ सबसे शक्ति कार्रवाई देखने को मिलेगी
17 दिसंबर को होगी मां पंचायत पर बदल सकता है स्थान कौन सा होगा नया ठिकाना
किसने की ओर से पहले 17 दिसंबर को कलेक्टर घेराव की घोषणा की गई थी लेकिन प्रशासन की ओर से ट्रैक्टरों की आवाज आई पर पाबंदी और शर्तें लगाई जाने के बाद किसानों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है
अभी हम बच्चा है तो हनुमानगढ़ जंक्शन की धान मंडी में आयोजित की जा सकती है साथ ही किसान नेताओं के अनुसार धान मंडी ऐसा स्थान है जहां बड़ी संख्या में किस आसानी से एकत्र होकर अपनी बात को मजबूती के साथ में प्रशासन के समक्ष रखपाएंगे
उनका आरोप यह भी बताया जा रहा है कि प्रशासन जानबूझकर आंदोलन को कमजोर करने के लिए पाबंदियां पर पाबंदी लगाया जा रहा है लेकिन किसी और शांति और उग्र घेराव की स्थिति ना होते हुए भी प्रशासन अपनी पावर का दुरुपयोग कर सकता है किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगे प्रशासन के समक्ष रखना चाहते हैं
ट्रैक्टर पर लगाया सात पवन नियम व शर्तें लागू
पसंदीदा ट्रैक्टर की आवाज आई पर लगाई गई रोको ने किसानों को एक बड़ा उग्र करने का मौका दे दिया है किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर उनके आंदोलन का प्रतीक है उन पर पाबंदी लगाना उनके अधिकारों का हनन करना है हालांकि प्रशासन का तार किया है कि इस कदम से कानून व्यवस्था को बनाया जाए रखा जाएगा और यातायात बाधित ना इसलिए इस उद्देश्य को उठाना उत्तरदाई बताया जा रहा है लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि यह गलत है इससे उनके आंदोलन की ताकत को एक सीमित करने की कोशिश की जा रही है
प्रशासन की स्थिति शांति बनाए रखना है प्रमुखप्राथमिकता]
जिला परिषद का कहना है कि उनके प्राथमिकता जिले में शांति और कानून व्यवस्था को बनाए रखना है हथियार अधिकारियों का दावा यह है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है परंतु दोनों के समक्ष किसी तौर पर स्पष्ट ना देखने पर आशाए देखने को मिलरहे हैं
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि आगजनी की घटना की जांच की जा रही है तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी लेकिन किस को प्रशासन की इस प्रक्रिया पर पूरा भरोसा नहीं है
धान मंडी महापंचायत से क्या निकल सकता है फैसला
17 दिसंबर को महापंचायत को लेकर पूरे जिले की निकाय टिकी हुई है माना जा रहा है कि इस पंचायत में आधुनिक की आगे की रणनीति और हरकत देखने को मिल सकती है इसमें कई प्रमुख मुद्दे शामिल हो सकते हैं
आंदोलन को और व्यापक रूप पर लाना
प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए ठोस कदम
अन्य किसान संगठनों से सहायता वसमर्थन
यदि इस बार महापंचायत में बड़ी संख्या में किस जोड़ते हैं तो यह आंदोलन के लिए एक बड़ी चुनौती के साथ ही चेतावनी का रूप भी ले सकता है
स्थानीय व्यापार पर क्या होगा इसका असर
किसान आंदोलन का असर केवल प्रशासन ताकि सीमित नहीं है धान मंडी या महापंचायत होने से स्थानीय व्यापार यातायात आरामचंद की दिनचर्या पर एक बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है व्यापारी वर्ग की स्थिति पर नजर बनाए हुए लगातार रखे हुए हैं और उम्मीद की जा रही है कि मामला शांति में तरीके से जल्द से जल्द सुलझाया जा सके
क्या बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है जान
हालांकि फिलहाल दोनों पक्षों में अपने-अपने रूप पर कड़ी तौर पर सख्त नजर आ रहे हैं लेकिन लेकिन कुछ सूत्रों का मानना है कि बातचीत का रास्ता पूरी तरह से बंद नहीं है अब तक यदि प्रशासन किसानों की मांग पर कुछ आवश्यक निर्णय नहीं लेता है तो तनाव ऐसे ही बना बना रह सकता है किसान किसान नेता बीएसएफ कर चुके हैं कि वह समाधान चाहते हैं लेकिन कोई टकराव की स्थिति नहीं है लेकिन समाधान न होने पर उन्हें ठोस एवं निर्णय कदम उठाने पड़ेंगे
निष्कर्ष : 17 दिसंबर को क्या होगा
राठी खेड़ा की एथेनॉल फैक्ट्री में आग लगने की घटना से शुरू है यह बड़ा विवाद अभी किसान आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है कलेक्टर वार्ता के बिना इंतजार रहने के बाद धान मंडी में होने जा रही मां पंचायत यह तय कर सकती है आगे हालत किस दिशा में जा सकते हैं
17 दिसंबर को डिनर सिर्फ किसानों के लिए बल्कि पूरे जिले के लिए एक हम दिन साबित हो सकता है अब देखने को मिलेगा कि प्रशासन और किसानों के बीच क्या शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए यह विवाद शांत की हो जाएगा या फिर यह इथेनॉल फैक्ट्री से शुरू हुआ विवाद किसी बड़ी मीन की ओर जाता हुआ साबित होगा इससे जुड़ी सभी बड़ी अपडेट के लिए जुड़े रहे