Steve Jobs: को पसंद था छोटा iPhone, लेकिन Tim Cook ने बदल दी सोच, ऐसे शुरू हुआ बड़े स्क्रीन वाले iPhone का दौर…!

Steve Jobs: को छोटा iPhone पसंद था, लेकिन Tim Cook के CEO बनने के बाद Apple ने बड़े डिस्प्ले और नए iPhone मॉडल्स की रणनीति अपनाई। जानिए iPhone 5 से iPhone 6 Plus और iPhone X तक Apple की रणनीति कैसे बदली।

Steve Jobs और Tim Cook की सोच में क्या था अंतर?

Apple का iPhone आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय स्मार्टफोन ब्रांड्स में शामिल है। बड़े डिस्प्ले, Pro मॉडल, Pro Max वेरिएंट और अलग-अलग कीमत वाले iPhone अब कंपनी की पहचान बन चुके हैं। लेकिन एक समय ऐसा था जब Apple का iPhone लाइनअप काफी सीमित था और कंपनी स्क्रीन के आकार को लेकर बहुत ज्यादा प्रयोग करने के पक्ष में नहीं थी।

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कंपनी के सह-संस्थापक Steve Jobs की सोच थी। Steve Jobs का मानना था कि स्मार्टफोन ऐसा होना चाहिए जिसे यूजर एक हाथ से आसानी से इस्तेमाल कर सके। इसी वजह से शुरुआती iPhone मॉडल्स में बहुत बड़े डिस्प्ले देखने को नहीं मिले।

हालांकि, समय के साथ स्मार्टफोन मार्केट तेजी से बदलने लगा। Android कंपनियों ने बड़े डिस्प्ले वाले फोन बाजार में उतारने शुरू कर दिए। यूजर्स को बड़ी स्क्रीन पर वीडियो देखने, गेम खेलने, इंटरनेट इस्तेमाल करने और दूसरे काम करने का अनुभव पसंद आने लगा।

इसी बदलते बाजार के बीच Tim Cook के नेतृत्व में Apple ने अपनी iPhone रणनीति में बड़ा बदलाव किया। कंपनी ने बड़े स्क्रीन वाले मॉडल पेश किए और बाद में अलग-अलग स्क्रीन साइज और प्रीमियम कैटेगरी के फोन पर भी ध्यान बढ़ाया।

यही बदलाव आगे चलकर iPhone 6 Plus, iPhone X और फिर Pro Max मॉडल्स तक पहुंचा।

Steve Jobs क्यों पसंद करते थे छोटा iPhone?

शुरुआती iPhone के डिजाइन और स्क्रीन साइज के पीछे सिर्फ तकनीकी सीमाएं ही वजह नहीं थीं। Steve Jobs यूजर एक्सपीरियंस को काफी महत्व देते थे।

उनकी सोच थी कि फोन को हाथ में पकड़ना और उसके ज्यादातर हिस्से तक अंगूठे से पहुंचना आसान होना चाहिए। अगर स्क्रीन बहुत बड़ी होगी तो यूजर को फोन इस्तेमाल करने के लिए दोनों हाथों की जरूरत पड़ सकती है।

उस समय स्मार्टफोन का इस्तेमाल आज की तरह वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और गेमिंग के लिए नहीं होता था। फोन का मुख्य इस्तेमाल कॉल, मैसेज, ईमेल, वेब ब्राउजिंग और कुछ बेसिक ऐप्स के लिए किया जाता था।

ऐसे में कॉम्पैक्ट स्क्रीन को काफी व्यावहारिक माना जाता था।

पहले कई iPhone मॉडल्स लगभग 3.5 इंच के डिस्प्ले के साथ आए। उस समय यह स्क्रीन साइज काफी बड़ा माना जाता था, लेकिन आज के 6 से 7 इंच वाले स्मार्टफोन के मुकाबले यह काफी छोटा दिखाई देता है।

Apple ने लंबे समय तक इसी डिजाइन फिलॉसफी को बनाए रखा।

iPhone 5 तक Apple की रणनीति काफी अलग थी

iPhone 5 को Apple ने 2012 में पेश किया था। यह Steve Jobs के निधन से कुछ समय पहले तैयार किया गया अंतिम iPhone मॉडल था और इसके डिजाइन में भी कंपनी की पुरानी सोच साफ दिखाई देती थी।

iPhone 5 में पहले के मॉडल्स की तुलना में स्क्रीन को थोड़ा लंबा किया गया था, लेकिन Apple ने डिस्प्ले को बहुत ज्यादा चौड़ा नहीं किया।

इसका मकसद फोन को हाथ में आराम से इस्तेमाल करने योग्य बनाए रखना था।

उस समय Android स्मार्टफोन कंपनियां लगातार बड़े डिस्प्ले वाले फोन पेश कर रही थीं। कई Android फोन 5 इंच से ज्यादा स्क्रीन के साथ बाजार में पहुंच चुके थे।

इसके बावजूद Apple ने शुरुआत में इस ट्रेंड को तेजी से फॉलो नहीं किया।

लेकिन स्मार्टफोन बाजार में यूजर्स की पसंद बदल रही थी और यही बदलाव Apple की आगे की रणनीति में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

Tim Cook के आने के बाद क्या बदला?

Tim Cook ने अगस्त 2011 में Apple के CEO के तौर पर Steve Jobs की जगह ली। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि कंपनी ने तुरंत Steve Jobs की सभी नीतियां बदल दीं।

Apple की प्रोडक्ट रणनीति में बदलाव धीरे-धीरे हुआ।

Tim Cook के नेतृत्व में Apple ने एक बात को ज्यादा गंभीरता से देखना शुरू किया कि बाजार में ग्राहक वास्तव में क्या खरीदना चाहते हैं।

Android स्मार्टफोन कंपनियां बड़ी स्क्रीन के साथ अलग-अलग कीमतों और फीचर्स वाले फोन पेश कर रही थीं। इससे यूजर्स के पास ज्यादा विकल्प मौजूद थे।

Apple के सामने चुनौती यह थी कि वह अपने प्रीमियम ब्रांड को बनाए रखते हुए बदलती ग्राहक पसंद के अनुसार iPhone को भी विकसित करे।

इसी सोच ने आगे चलकर बड़े डिस्प्ले वाले iPhone की राह तैयार की।

iPhone 6 और iPhone 6 Plus ने बदली पूरी कहानी

Apple की बड़ी स्क्रीन रणनीति का सबसे बड़ा मोड़ 2014 में आया।

कंपनी ने iPhone 6 और iPhone 6 Plus लॉन्च किए। पहली बार Apple ने एक ही सीरीज में दो अलग-अलग स्क्रीन साइज का विकल्प दिया।

iPhone 6 में 4.7 इंच का डिस्प्ले था, जबकि iPhone 6 Plus में 5.5 इंच की बड़ी स्क्रीन दी गई।

यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि Apple अब सिर्फ कॉम्पैक्ट फोन पर निर्भर नहीं था।

कंपनी ने यूजर्स को विकल्प दिया कि अगर उन्हें सामान्य आकार का iPhone चाहिए तो iPhone 6 खरीदा जा सकता है और अगर बड़ी स्क्रीन पसंद है तो iPhone 6 Plus मौजूद था।

इस रणनीति ने Apple को उस ग्राहक वर्ग तक पहुंचने में मदद की जिसे बड़ी स्क्रीन चाहिए थी।

बड़ी स्क्रीन का फायदा खास तौर पर वीडियो देखने, फोटो देखने, गेमिंग, वेब ब्राउजिंग और डॉक्यूमेंट पढ़ने में दिखाई देता था।

Plus मॉडल सिर्फ बड़ी स्क्रीन तक सीमित नहीं था

iPhone 6 Plus का महत्व सिर्फ इसके बड़े डिस्प्ले तक सीमित नहीं था। Apple ने यह समझ लिया था कि अलग-अलग यूजर्स की जरूरतें अलग हो सकती हैं।

कुछ लोग छोटे फोन को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि वह जेब में आसानी से रखा जा सकता है और एक हाथ से इस्तेमाल किया जा सकता है।

दूसरी तरफ कुछ यूजर्स बड़ी स्क्रीन चाहते हैं क्योंकि उनके लिए मल्टीमीडिया और कंटेंट कंजम्पशन ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Plus मॉडल ने इन दोनों जरूरतों के बीच एक नया विकल्प तैयार किया।

यही रणनीति बाद के वर्षों में Apple के iPhone लाइनअप का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

Apple ने बड़े स्क्रीन वाले फोन को क्यों अपनाया?

बड़े स्क्रीन वाले स्मार्टफोन की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे कई कारण थे।

सबसे बड़ा कारण स्मार्टफोन के इस्तेमाल का तरीका बदलना था। फोन अब सिर्फ कॉल करने की डिवाइस नहीं रह गया था।

लोग स्मार्टफोन पर YouTube और दूसरी वीडियो सेवाओं पर कंटेंट देखने लगे। सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। मोबाइल गेमिंग लोकप्रिय हुई। ऑनलाइन शॉपिंग और बैंकिंग जैसे काम भी फोन से होने लगे।

इन सभी गतिविधियों के लिए बड़ी स्क्रीन ज्यादा सुविधाजनक होती है।

इसके अलावा स्मार्टफोन कैमरा भी तेजी से बेहतर हो रहा था। बड़ी स्क्रीन पर फोटो और वीडियो देखने का अनुभव छोटे डिस्प्ले की तुलना में बेहतर हो सकता है।

Apple के लिए यह जरूरी हो गया था कि वह यूजर की बदलती आदतों को समझे।

iPhone X ने डिजाइन की दिशा भी बदल दी

2017 में Apple ने iPhone X पेश किया। यह फोन कंपनी के लिए एक और बड़ा बदलाव लेकर आया।

iPhone X में लगभग पूरी फ्रंट सतह पर डिस्प्ले देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। Home Button को हटाया गया और Face ID जैसी तकनीक पेश की गई।

यहां Apple की रणनीति सिर्फ स्क्रीन बड़ी करने तक सीमित नहीं थी। कंपनी अब ज्यादा स्क्रीन को कॉम्पैक्ट बॉडी में फिट करने पर ध्यान दे रही थी।

यानी Apple ने उस पुराने विचार को एक अलग तरीके से आगे बढ़ाया जिसमें फोन को हाथ में संभालना आसान रहे, लेकिन डिस्प्ले ज्यादा बड़ा हो।

इससे स्मार्टफोन डिजाइन का पूरा ट्रेंड बदलने में भी मदद मिली।

फिर आया Pro और Pro Max का दौर

समय के साथ Apple ने iPhone लाइनअप को और ज्यादा विस्तारित किया।

कंपनी ने अलग-अलग मॉडल और स्क्रीन साइज पेश करने शुरू किए। बाद में Pro और Pro Max जैसे प्रीमियम मॉडल्स ने iPhone लाइनअप में अलग स्थान बनाया।

Pro Max मॉडल्स में बड़ी स्क्रीन के साथ ज्यादा प्रीमियम हार्डवेयर, बेहतर कैमरा सिस्टम और दूसरी एडवांस सुविधाओं पर जोर दिया गया।

इससे Apple के पास अलग-अलग तरह के ग्राहकों के लिए कई विकल्प तैयार हो गए।

जो ग्राहक कॉम्पैक्ट फोन चाहता है उसके लिए छोटा मॉडल, सामान्य यूजर के लिए स्टैंडर्ड मॉडल और बड़ी स्क्रीन व ज्यादा प्रीमियम फीचर्स चाहने वालों के लिए Pro Max जैसे विकल्प सामने आए।

iPhone की स्क्रीन साइज रणनीति कैसे बदली?

दौरiPhone रणनीतिप्रमुख बदलाव
शुरुआती iPhoneकॉम्पैक्ट डिजाइनएक हाथ से इस्तेमाल पर जोर
iPhone 5लंबा डिस्प्लेस्क्रीन में सीमित बढ़ोतरी
iPhone 6बड़ा डिस्प्ले4.7 इंच स्क्रीन
iPhone 6 Plusबड़ी स्क्रीन कैटेगरी5.5 इंच डिस्प्ले
iPhone Xज्यादा स्क्रीनHome Button हटाकर नया डिजाइन
Pro Max दौरप्रीमियम बड़ी स्क्रीनबड़े डिस्प्ले और एडवांस हार्डवेयर

क्या Tim Cook ने Steve Jobs की सोच को पूरी तरह बदल दिया?

ऐसा कहना सही नहीं होगा कि Tim Cook ने Steve Jobs की सोच को पूरी तरह बदल दिया।

Apple ने कई मामलों में Steve Jobs की मूल सोच को बरकरार रखा। कंपनी आज भी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच बेहतर तालमेल, सरल यूजर इंटरफेस और प्रीमियम डिजाइन पर काफी ध्यान देती है।

बदलाव मुख्य रूप से बाजार की जरूरतों के अनुसार हुआ।

Steve Jobs के समय स्मार्टफोन मार्केट शुरुआती दौर में था। उस समय कॉम्पैक्ट डिजाइन को लेकर काफी जोर था।

Tim Cook के समय तक स्मार्टफोन एक मल्टीमीडिया और कंप्यूटिंग डिवाइस बन चुका था।

इसलिए Apple को अपने प्रोडक्ट को नए इस्तेमाल के हिसाब से विकसित करना पड़ा।

बड़े iPhone ने Apple को क्या फायदा दिया?

बड़े स्क्रीन वाले iPhone ने Apple को कई स्तर पर फायदा पहुंचाया।

पहला फायदा यह था कि कंपनी उन ग्राहकों को आकर्षित कर सकी जिन्हें पहले Android के बड़े स्क्रीन वाले फोन पसंद आते थे।

दूसरा फायदा यह था कि Apple के पास अलग-अलग कीमत और स्क्रीन साइज के मॉडल पेश करने का अवसर बढ़ा।

तीसरा फायदा यह रहा कि बड़ी स्क्रीन वाले प्रीमियम मॉडल्स ने iPhone की हाई-एंड कैटेगरी को मजबूत किया।

Pro Max जैसे मॉडल आज Apple के सबसे प्रीमियम iPhone विकल्पों में शामिल हैं।

इनमें बड़े डिस्प्ले के साथ कैमरा, प्रोसेसर, बैटरी और दूसरी तकनीकों पर भी जोर दिया जाता है।

आज का iPhone Steve Jobs के दौर से कितना अलग है?

अगर शुरुआती iPhone और आज के iPhone को देखा जाए तो अंतर काफी बड़ा है।

पहले जहां 3.5 इंच के आसपास का डिस्प्ले सामान्य था, वहीं आज iPhone लाइनअप में बड़े स्क्रीन वाले मॉडल मौजूद हैं।

आज स्मार्टफोन का इस्तेमाल सिर्फ फोन कॉल के लिए नहीं बल्कि कैमरा, वीडियो, गेमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन पेमेंट, ऑफिस वर्क और मनोरंजन के लिए भी होता है।

इसी वजह से स्क्रीन साइज और बैटरी जैसे पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।

Apple ने भी इसी बदलाव के अनुसार अपने iPhone को विकसित किया।

क्या छोटा iPhone अब पूरी तरह खत्म हो गया?

Apple ने समय-समय पर छोटे आकार के iPhone भी पेश किए। iPhone mini सीरीज इसका एक उदाहरण रही।

कंपनी ने छोटे स्क्रीन वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए iPhone 12 mini और iPhone 13 mini जैसे मॉडल पेश किए थे।

हालांकि, बाद के iPhone लाइनअप में Apple का फोकस बड़े स्क्रीन वाले मॉडल्स पर ज्यादा दिखाई दिया।

इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में बड़ी स्क्रीन वाले फोन की मांग कंपनी की रणनीति के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

यह भी दिखाता है कि Apple जरूरत के अनुसार अलग-अलग रणनीतियों को आजमाने से पीछे नहीं हटता।

बड़ी स्क्रीन सिर्फ दिखावे की चीज नहीं

बड़े डिस्प्ले को सिर्फ डिजाइन या दिखावे से जोड़ना सही नहीं होगा।

आज स्मार्टफोन पर कंटेंट की मात्रा काफी बढ़ चुकी है। वीडियो, गेम, फोटो, डॉक्यूमेंट और वेबसाइट जैसे कंटेंट के लिए बड़ी स्क्रीन उपयोगी हो सकती है।

साथ ही, हाई रिफ्रेश रेट, बेहतर ब्राइटनेस और OLED जैसी डिस्प्ले तकनीकों ने स्मार्टफोन स्क्रीन को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है।

इसलिए Apple की स्क्रीन रणनीति में बदलाव को सिर्फ आकार बढ़ने के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह स्मार्टफोन के बदलते इस्तेमाल का परिणाम भी है।

Apple की रणनीति से क्या सीख मिलती है?

Apple की iPhone यात्रा से एक बड़ी बात सामने आती है कि किसी कंपनी की प्रोडक्ट रणनीति समय के साथ बदल सकती है।

Steve Jobs के दौर में एक हाथ से इस्तेमाल होने वाला कॉम्पैक्ट फोन महत्वपूर्ण था। बाद में यूजर्स की जरूरतें बदलने लगीं और बड़े डिस्प्ले की मांग बढ़ी।

Tim Cook के नेतृत्व में Apple ने इस बदलाव को स्वीकार किया और iPhone लाइनअप में नए स्क्रीन साइज पेश किए।

iPhone 6 Plus से शुरू हुआ यह बदलाव आगे चलकर Pro Max जैसे बड़े और प्रीमियम मॉडल्स तक पहुंचा।

यानी Apple ने अपनी मूल पहचान बनाए रखते हुए बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार अपने प्रोडक्ट को बदला।

आगे iPhone की रणनीति किस दिशा में जा सकती है?

आने वाले समय में स्मार्टफोन का मुकाबला सिर्फ स्क्रीन साइज को लेकर नहीं होगा। फोल्डेबल डिस्प्ले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कैमरा तकनीक, बैटरी और नई कनेक्टिविटी जैसी तकनीकें ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

Apple भी इन क्षेत्रों में अपने तरीके से आगे बढ़ रहा है।

अगर भविष्य में फोल्डेबल iPhone या दूसरे नए फॉर्म फैक्टर बाजार में आते हैं, तो यह Apple की प्रोडक्ट रणनीति में एक और बड़ा बदलाव हो सकता है।

हालांकि, किसी भी नए प्रोडक्ट या फीचर के बारे में आधिकारिक जानकारी आने तक रिपोर्ट्स और लीक्स को संभावित जानकारी के तौर पर ही देखना चाहिए।

निष्कर्ष

Steve Jobs के समय Apple का iPhone कॉम्पैक्ट डिजाइन और एक हाथ से इस्तेमाल करने की सोच के लिए जाना जाता था। लेकिन स्मार्टफोन बाजार तेजी से बदला और यूजर्स की जरूरतें भी बदल गईं।

Tim Cook के नेतृत्व में Apple ने बड़े डिस्प्ले की बढ़ती मांग को स्वीकार किया। iPhone 6 और iPhone 6 Plus इस बदलाव के सबसे बड़े उदाहरण बने। इसके बाद iPhone X ने डिजाइन को नई दिशा दी और आगे चलकर Pro Max मॉडल्स ने बड़ी स्क्रीन वाले प्रीमियम iPhone की पहचान को मजबूत किया।

इस पूरी यात्रा को सिर्फ Steve Jobs बनाम Tim Cook की सोच का अंतर मानना सही नहीं होगा। असल में यह बदलते स्मार्टफोन बाजार और यूजर्स की बदलती जरूरतों के साथ Apple की रणनीति के विकास की कहानी है।

आज का iPhone शुरुआती iPhone से काफी अलग है, लेकिन Apple की कोशिश अभी भी यही रहती है कि हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और यूजर एक्सपीरियंस को एक साथ बेहतर बनाया जाए। यही कारण है कि छोटे स्क्रीन से शुरू हुआ iPhone आज बड़े Pro Max मॉडल तक पहुंच चुका है।

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